Bimal Raturi

"भीड़ में अकेला खड़ा मै ताकता सब को..."

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वैश्या

Posted On: 2 Jun, 2012 Others में

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sex_worker_indian_tabela

वैश्या हूँ मै वैश्या…

अलग जिंदगी जीती

अपने जिस्म से खुद को पालने की कोशिश करती

पैसा तो कमाया पर इज्ज़त न कमा सकी

इज्ज़त कमाती भी कैसे???

दुनिया के सबसे इज्ज़तदार ही तो मेरे ग्राहक हैं

वो ही लूट ले जाते हैं मेरी इज्ज़त

क्या करें जीना तो है ही हमे

चाहे इन बदनाम गलियों में ही क्यूँ न जीना पड़े

सोचा न था कभी कोठे पे आउंगी

पर मेरी किस्मत मुझे यहाँ ले आई

किसी ने बेच जो दिया था मुझे यहाँ

इस मौसी के हाथों…

क्या करती ???

कहाँ जाती ???

बेबस…

लाचार…..

क़ोसिस की वापस जाने की…

पर इन इज्ज़तदारो ने ही मुझे….

समाज में मिलने न दिया

इन्होने ही मुझ से खेला था…

मेरी मासूमियत को नोचा था

खैर… अपना लिया इस धंधे को मैंने

क्या करें…

गन्दा है पर धंधा है ये…

बेटा हुआ तो भडवा(दलाल) बनेगा…

और बेटी…

मुझ जैसे ही कईयों का दिल बहलाएगी…

मुझे नहीं पता आखिरी क्या मंजिल है मेरी

पर सिर्फ इतना कहूँगी

इन इज्ज़त वालों ने इज्ज़तदार कहलाने के लिए

मेरी इज्ज़त लुटा दी

सोना  गाछी हो या जी.बी रोड

सब जगह एक ही कहानी है

चारदिवारी में कैद हमारी ये जिंदगानी है…

और जिंदगी की आखिरी रात भी हमे यहीं बितानी है

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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

चन्दन राय के द्वारा
June 4, 2012

सोना गाछी हो या जी.बी रोड विमल जी, सब जगह एक ही कहानी है चारदिवारी में कैद हमारी ये जिंदगानी है… और जिंदगी की आखिरी रात भी हमे यहीं बितानी है वैश्या के जीवन की सच्ची तस्वीर कहती कविता

    Bimal Raturi के द्वारा
    June 4, 2012

    thanks sir

dineshaastik के द्वारा
June 3, 2012

इन इज्ज़त वालों ने इज्ज़तदार कहलाने के लिए मेरी इज्ज़त लुटा दी विमल  जी बहुत ही सुन्दर, वेश्याओं का पीड़ा की मार्मिक  प्रस्तुति……. http://dineshaastik.jagranjunction.com/2012/06/01/%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%87%E0%A4%9C-%E0%A4%97%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82/

    Bimal Raturi के द्वारा
    June 3, 2012

    thanks……….

    dineshaastik के द्वारा
    June 3, 2012

    विमल  जी आदरणीय  राजकमल  जी की बातों को गंभीरता से लीजिये। इस  तरह की तस्वीरें इस  मंच  के लिये शर्मनाक  हैं। कृपया इसे गम्भीरता  से लीजिये। आपका आभार व्यक्त करूँगा।

    bharodiya के द्वारा
    June 4, 2012

    आप की कविता का सार तो बताता है की आपको बहुत फिकर है ईन की । ठीक है, तस्विर लगाते समय आप का ध्यान नही गया की मुझे जीन की चिंता है उन को ही मैं बदनाम बस्ती से बाहर ले जा कर पूरी दुनिया में बदनाम कर रहा हुं । उन की तो मजबूरी होती है वहा रहने की, आप की क्या मजबूरी ईसे नही हटाने की । सिर्फ जीद । आप की जीद मानवता से उपर है ।

    June 6, 2012

    बहुत खूब……आपके जज्बे और सच्चाई को सलाम करता हूँ…..और जो लोग इसे हटाने की बात कर रहे हैं, उनके लिए दुष्यंत जी की एक रचना भेंट करना चाहता हूँ………….. तुम्हारे पाँवों के नीचे कोई ज़मीं नहीं, कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यकीं नहीं. मैं बेपनाह अँधेरा को सुबह कैसे कहूँ, मैं इन नज़ारों का अँधा तमाशबीन नहीं. तेरी जुबान है झूठी जम्हूरियत की तरह, तू एक जलील-सी गाली से बेहतरीन नहीं. तुम्हीं से प्यार जताएं तुम्हीं को खा जायें, अदीब यों तो सियासी हैं पर कमीन नहीं. तुझे कसम है खुदी को बहुत हलाक न कर, तू इस मशीन का पुर्जा है, मशीन नहीं. बहुत मशहूर है आयें ज़रूर आप यहाँ, ये मुल्क देखने के लायक है, हसीं नहीं. जरा से तौर तरीकों में हेर-फेर करो, तुन्हारे हाथ में कालर हो, आस्तीन नहीं……

Bimal Raturi के द्वारा
June 3, 2012

pic nahi hategi aur na hi post………..agar aap chahe ho mujhe padhna chod den dhanyawaad……

Bimal Raturi के द्वारा
June 4, 2012

shirmaan pic kisi bhi halat me nahi hategi……..


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