Bimal Raturi

"भीड़ में अकेला खड़ा मै ताकता सब को..."

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न जाने कौन सा घोटाला दफन हुआ...

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21-6-2012-FIRE-gh10-O

दिनांक २१ जून, जगह महाराष्ट्र की सब से सुरक्षित जगहों में से एक मुंबई मंत्रालय जहाँ मुख्यमंत्री और सारे मुख्य बिभागों का मुख्यालय था और वहाँ देखते ही देखते आग और धुवें के मंजर में तब्दील हो गया, चौथी मंजिल से लगी आग ने पांचवी और छट्टी मंजिल भी आगोश में ले लिया

क्या आप को ये बात पच रही है???

जो सरकार इतने घोटालों में फंसी हो, सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस पे नोटिस भेजे जा रहा हो, और चरों तरह से कोई सरकार फंसी हो अचानक एक दिन खबर आती है कि मंत्रालय में आग लग गयी सब कुछ जल के ख़ाक… बिठा लो जांच…क्या कर सकता है कोई????

सी.बी.आई. अभी तक कह रही है कि आदर्श कि फाइलें बची हैं उन्हें नुकसान नहीं पंहुचा है,पर जो इतना बड़ा कांड करा सकता है क्या उस ने फाइलें बचाने के लिए ये आग लगवाई???

मुझे तो इस आग के पीछे बहुत बड़ी साजिस कि बू आ रही है,जिस से शायद बहुत लोगों के काले कारनामे भी जल गये|

मंत्रालय यानि सुरक्षित जगहों में से एक अगर हम बात करें सुरक्षा इंतजामों की तो आन्तरिक फायर उपकरण नहीं थे क्या ? फायर अलार्म तो अब लोग अपने लैट्रिन में भी लगा रहे हैं तो क्या मंत्रालय में ये नहीं लगा था??

चलो ये भी छोड़ो अब बात करते हैं शार्ट सर्किट की, एम्.सी.बी. नहीं लगी थी क्या वो चिंगारियों को रोक पाती या विधुत सप्लाई को बंद कर पाती? और क्या मंतालय में पेट्रोल के कनस्तर रखे थे जो अचानक इतने बड़े इलाके को आग ने घेर लिया??? या मंत्रालय के सुरक्षा अधिकारियों को लकवा मार गया था जो   किसी को भी पता नहीं चला की आग लगी है???

मुझे तो ये बात पच नहीं रही है कि इतनी मॉडर्न और इतनी सुरक्षित इलाके को इतनी बड़ी आग अचानक घेर ले…

शायद हम भी इस पर शक न करते पर भारत को इन नेताओं ने इतना नोच नोच के खा लिया है,और रोजाना सुनाई देने वाले घोटालों के हम इतने आदि हो चुके हैं कि शक करने कि आदत हो गयी है कि न जाने कौन से सबूत जले ? कौन सी फाइलें जली? कौन सा घोटाला जला?या किस के कारनामे जले?

भारत का इतिहास रहा है जांचे बैठती रहती है और  हमेशा ढ़ाक के तीन पाद ही रहते हैं,वरना आज का कब का भोपाल गैस कांड कि जाँच खत्म हो चुकी,कब का गोधरा निबट चूका होता,कब का कश्मीर शांत हो चूका होता |

शक तो भा.जा.पा. भी कर रही है पर में उन्हें कहूँगा खुशियाँ ही मनाओ, क्या पता उन के राज भी जलें हों..खैर विपक्ष में है तो हल्ला मचाना ही है…..

पर मंत्रालय में आग…… मुझे तो नी पच रही…क्या आप को पच रही है????



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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Mohinder Kumar के द्वारा
June 25, 2012

विमल जी, आग किसी भी वजह से लगी हो परन्तु पांच लोगों की आहुती अत्यन्त दुखद है. इस लापरवाही के लिये दोषी व्यक्तियों को कठोर सजा दी जानी चाहिये.

rekhafbd के द्वारा
June 23, 2012

बिमल जी , इस देश में बड़े बड़े घोटाले भी पच जाते है और डकार तक नही आती ,यह किस खेत की ……….,बढ़िया आलेख ,लेकिन दुःख है कि कुछ लोगों कि जान चली गई

चन्दन राय के द्वारा
June 23, 2012

रतौरी जी , हाँ जी मुझे भी नहीं पाच रही , क्यूंकि केमिकल इन्जिनीर होने के नाते मुझे आग के प्रकार और अग्निशमन यंत्रो की जानकारी है , सुन्दर लेखन !

yogi sarswat के द्वारा
June 23, 2012

घोटालों के साथ ५ लोगों भी दफ़न हुए ! अब ढूंढ ले सी .बी. आई . फाइलों को ! चला ले किस पर किस चलाएगी ! ये कांग्रेस है , क्या क्या कर सकती है और क्या क्या करवा सकती है , अभी पता चल रहा है ! badhiya lekhan

    Bimal Raturi के द्वारा
    June 23, 2012

    thanks

Bhupesh Kumar Rai के द्वारा
June 23, 2012

बिमल जी , घोटालेबाज तो राजनीति के कवच में वैसे ही पूरी तरह से सुरक्षित हैं,जब किसी घोटालेबाज को कुछ नुकसान होना ही नहीं होना था तो घोटालों के राज दफ़न करने को आग लगा दी,या लग गई इससे क्या फर्क पड़ता है.फाइलों के पुलिंदे जिनसे कभी इंसाफ मिलना ही नहीं हैं जलें या न जलें,किसी काम के नहीं हैं. आग से तो देश की संपत्ति और पर्यावरण का जबरदस्त नुकसान हुआ है.

June 22, 2012

इब्त दाए-इश्क है रोता है क्या…………….आआगे -आगे देखिये……………..हाँ….हाँ….हाँ…………!

dineshaastik के द्वारा
June 22, 2012

बिमल  जी आपको साजिश  की केवल  बू आ   रही है, मुझे तो  स्पष्ट ही साजिश  दिख  रही है। यह सब हाई कमान की मर्जी  से होता है। हम  तो केवल  तामशा ही देख  सकते हैं।


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