Bimal Raturi

"भीड़ में अकेला खड़ा मै ताकता सब को..."

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सठिया के जोगी बांध रोके

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“गंगा को अविरल बहने दो गंगा को निर्मल रहने दो”

आजकल बड़ा हॉट टापिक है ये उत्तराखंड में,और ये और भी ज्यादा हॉट हो चूका है जलपुरुष राजेंद्र सिंह,प्रो.अग्रवाल उर्फ़ सानंद को बेज्जती कर के भगाने के बाद,बेचारे डॉ. झुनझुनवाला श्रीनगर में ही रह के पिटे,उन पर स्याही भी पोत दी थी…खैर रंग रोगन तो चलता ही रहता है मुख्या मुद्दे पर आते हैं गंगा की गन्दगी पर
वाकई गंगा में बढ़ता प्रदुषण एक सोचनीय स्थिति में पहुँच चूका है,पहले हम बनारस की गंगा को गन्दा कहते थे,और मै किसी को क्या कहूँ मैंने खुद बनारस में गंगा माँ को दूर से ही प्रणाम किया उस पानी को छूने की हिम्मत नहीं हुई,पर नई रिसर्च ने बताया है की गंगा मैदानों में बहने से पहले यानि ऋषिकेश में ही प्रदूषित हो चुकी है,अगर मै बड़े तौर पर ऋषिकेश तक की बात करूँ तो मुझे चंद फैक्ट्रियां,कई गंदे नाले,कई कस्बों के गटर के पाइप ही इस की वजह लग रहे हैं,
पर आप अगर इस पर हो रही राजनीति को देखेंगे तो बांध बंद कराने के अलावा सानंद और उन की टीम  को कोई चारा नहीं दिख रहा, हो सकता है की बांध भी इस प्रदुषण के कारण हों,पर क्या 90% से ज्यादा बन चुके बांधों को बंद कर देना क्या उचित फैसला है?
बात करें अगर सानंद की वो उस समय कहाँ थे जब ये बांध अपनी प्रारंभिक अवस्था में थे, प्रो.अग्रवाल ने ज़िन्दगी आई.आई.टी. में काटी और रिटायर होने के बाद जब घर काटने दौड़ा तो उन्हें गंगा माँ की याद आई, वो तो खुद वैज्ञानिक हैं वो अपने साथ के वैज्ञानिकों की टीम बना कर गंगा में बढ़ रहे प्रदुषण को रोकने का उपचार बता सकते थे पर नहीं, किसी ने कहा था सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं मेरी कोसिस है की ये सूरत बदलनी चाहिए,और सानंद ने इसे शायद गलत तरीके से ले लिया ,हुआ क्या ??? पहले उत्तरकाशी से भगाए गये फिर हरिद्वार,और फिर श्रीनगर
क्यूंकि जिन बांधों को बंद कराने की वो बात कर रहे हैं उन से लाखों घरों को 2 वक़्त की रोटी मिल रही है,गंगा मेरी भी माँ है पर यहाँ पर मै बांध न बंद करने के समर्थन में इस लिए लिख रहा हूँ क्यूंकि न तो ये उन लाखों लोगों की भलाई का ही फैसला है और न ही ये देश हित का ही फैसला है बांध बंद करने के बाद कहाँ से लायेंगे आप बिजली?
आप के पास कोयला नहीं है,आप के पास नाभिकीय उर्जा नहीं है,पेट्रोल डीजल के दाम आसमान छु रहे हैं और पवन उर्जा का हाल भी धाक के तीन पात है तो बताएं कहाँ से लायेंगे उर्जा? कैसे इंडिया को शाइन करेंगे? पूरे  भारत में विधुत विभाग द्वारा कटोती की जा रही है अच्छी बात है, 1 घंटे या 2 घंटे के बलिदान के लिए सब तैयार भी हैं पर 18 से 20 घंटों के बलिदान के लिए कोई तैयार नहीं है,तब आप उन लोगों के सामने गंगा को साफ़ रखने का रोना नहीं रो सकते आप को कोई न कोई समाधान सोचना ही पड़ेगा,क्यूंकि उत्तराखंड जैसे राज्य में पनविधुत परियोजनाओ में काफी पैसा लग चूका है और वो कई हद्द तक पूरे देश को बिजली पहुचाने में कामयाब भी रहे हैं ऐसे में क्या उन्हें बंद कर देना ठीक होगा?

मै प्रो.अग्रवाल का विरोध इस लिए ही कर रहा हूँ क्यूंकि न कभी उन्होंने इस बात पर कहा की गंगा कैसे साफ़ होनी चाहिए,न कभी कोई समाधान दिया,न कभी उन फैक्टियों से निकलने वाले गंदे पानी पर कुछ कहा और न ही सीवर के गंदे पानी के निस्तारण के लिए ही कोई अच्छा प्लान दिया, बांधों को रोकना उसी तरह है जैसे एक समस्या से निकलने के लिए दूसरी बड़ी समस्या खड़ी कर देना….
बांधों को बंद करना समस्या है समाधान नहीं,हमे समाधान की तरफ बढ़ना है नई समस्या की तरफ नहीं
क्यूंकि लोग गंगा को तो गन्दा देख सकते हैं पर अपने बच्चों को भूखा नहीं….
सुना ही था बुढ़ापे में आदमी सठिया जाता है प्रो.अग्रवाल को तो में देख भी रहा हूँ देखते हैं अभी क्या क्या ड्रामा दिखाते हैं प्रो.अग्रवाल


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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
June 30, 2012

मैं आपके विचारों से सहमत नहीं हूँ क्योंकि एक वृद्ध व्यक्ति वाही कर सकता है जो वो कर रहे हैं ! ये तो हमें सोचना चाहिए की हम उन्हें इस पवित्र कार्य में सहयोग करें !

    Bimal Raturi के द्वारा
    June 30, 2012

    kya wo bridh hone ke baad scientist nahi rhe???? kya wo solution nahi de sakte hain????


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