Bimal Raturi

"भीड़ में अकेला खड़ा मै ताकता सब को..."

52 Posts

123 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 8725 postid : 49

धूमिल उम्मीदें शहर बसाने की ...

Posted On: 6 Aug, 2012 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

flood-uttarakhand

ज़िन्दगी
कीमत क्या है तेरी?
वजन क्या है तुझे में?
कैसे तुझ पे बिस्वास करूँ
चंद घंटों की बारिश और सब कुछ तबाह…
सारे घर तबाह… सारे आशियाने तबाह
किसी की माँ गायब है तो किसी के पिता
किसी के बच्चे की खबर नहीं
किसी के सुहाग का कुछ न पता
सरकारी पैसा…..
हा हा हा….
साले सरकारी भडवे…
इस तबाही के वक़्त भी अपना हिस्सा मांगते हैं
सड़के,मकान जमीन,खेत खलिहान
सब गायब हैं
सब कुछ बह गये….
मुझे नहीं पता कब दुबारा फिर शहर बसेगा
मुझे नहीं पता फिर कब इस चमन में फूल खिलेगा
मुझे तो हंसी आती है
कैसे दम्म भरते हैं इस ज़िन्दगी का हम
कैसे गुमान करते हैं इस ज़िन्दगी पे हम
पर एक झटके में सब गायब
बची है तो आज भी कुछ जिंदगियां
और फिर से नया शहर बसने की कुछ धूमिल उम्मीदें ….

ज़िन्दगी

कीमत क्या है तेरी?

वजन क्या है तुझे में?

कैसे तुझ पे बिस्वास करूँ

चंद घंटों की बारिश और सब कुछ तबाह…

सारे घर तबाह… सारे आशियाने तबाह

किसी की माँ गायब है तो किसी के पिता

किसी के बच्चे की खबर नहीं

किसी के सुहाग का कुछ न पता

सरकारी पैसा…..

हा हा हा….

साले सरकारी भडवे…

इस तबाही के वक़्त भी अपना हिस्सा मांगते हैं

सड़के,मकान जमीन,खेत खलिहान

सब गायब हैं

सब कुछ बह गये….

मुझे नहीं पता कब दुबारा फिर शहर बसेगा

मुझे नहीं पता फिर कब इस चमन में फूल खिलेगा

मुझे तो हंसी आती है

कैसे दम्म भरते हैं इस ज़िन्दगी का हम

कैसे गुमान करते हैं इस ज़िन्दगी पे हम

पर एक झटके में सब गायब

बची है तो आज भी कुछ जिंदगियां

और फिर से नया शहर बसने की कुछ धूमिल उम्मीदें ….



Tags:           

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (5 votes, average: 4.20 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
August 9, 2012

साले सरकारी भडवे… इस तबाही के वक़्त भी अपना हिस्सा मांगते हैं सड़के,मकान जमीन,खेत खलिहान सब गायब हैं सब कुछ बह गये…. बहुत संवेदनशील विषय पर सार्थक लेखन ! उन्हें तो मौत में भी माल चाहिए ! बेहतरीन शब्द

yamunapathak के द्वारा
August 8, 2012

यही सत्य है पर हम सब इसे झुठलाने में लगे रहते हैं. इसलिए अपने प्रत्येक समय को उपयोगी बनाना ज़रूरी है. काल किसी को नहीं बख्शता,नेक काम करने से क्या पता किसकी दुआओं का असर मुश्किल वक्त में भी हौसला दे जाए. बहुत उम्दा सोच है आभार


topic of the week



latest from jagran