Bimal Raturi

"भीड़ में अकेला खड़ा मै ताकता सब को..."

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“वैश्या” सही है या गलत...

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Brothels & Fundamentalism
हर शहर की अलग अलग कहानियाँ है इस विषय पर…लाचारी,शौक,गरीबी,अशिक्षा,हिंसा और भी कई शब्द जुड़ें हैं इस वैश्या शब्द के साथ|
देहरादून की कहानियों में तीन शब्दों ने ज्यादा जगह बनाई है पहला “शौक” और दूसरा “लाचारी” और तीसरा “विद्रोह” |

शौक से जुडी वो कहानियां है जिन से मुख्य रूप से कॉलेज जाने वाली लड़कियां जुडी हुई हैं,और देहरादून की ज़िन्दगी को और ऐशो आराम से काटने के लिए जो पैसा चाहिए वो यहाँ से कमाती है,इन के अधिकतर बाहर की लड़कियां हैं,और कब ज्यादा ऐसो आराम की ज़िन्दगी की चाह इन्हें गलत रास्ते  मोड़ देती है इन्हें खुद नहीं पता होता…

दूसरा शब्द “लाचारी” हर महानगर की तरह देहरादून में भी कई इलाके ऐसे हैं जहाँ की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है,वहां के पुरुष पहले तो काम नहीं करते,और अगर छोटा मोटा करते भी हैं तो वो उन के शराब के लिए कम पड़ता है,महिला भी छोटे मोटे काम करती हैं पर जिस तरह हर जगह उन का शोषण होता है वो बातें आज भी हमारे कानो में नहीं पड़ती|

“चल में तेरे घर 5 किलो आटा,चावल रखवा दूंगा चल मेरे साथ आज रात के लिए”

“चल मैं तेरे बीमार बेटे का इलाज़ करा दूंगा चल मेरे साथ”

“चल तेरे बच्चों की 4 महीने की फीस दे दूंगा चल ….”

और तो और ये सुनकर दिमाग झन्ना गया मेरा

“चल मैं तेरा गिरवी पडा मंगलसूत्र छुडवा दूंगा चल मेरे साथ”

“पेट की आग बहुत बुरी होती है बिमल जी और एक माँ अपने बच्चों को कभी खाली पेट नहीं सोने दे सकती” इस लिए हमे ये करना पड़ता है|

तीसरे शब्द की विद्रोह की कहानियों में आप को कुछ भी अजीब नहीं लगेगा,क्यूंकि आप और मैं सीधे सीधे उसी मानसिकता के शिकार हैं,आज भी हमे लगता है कि औरत की सफलता कहीं न कहीं उस के शरीर उस के जिस्म से जुडी है|

एक औरत ने मुझे बताया कि मैं दिन भर मेहनत करती हूँ,सुबह से शाम तक पसीना बहती हूँ,तब भी मेरा पति मेरी सास कहती है कि तू अपनी चमड़ी की कमाई खाती है | अगर मैं किसी के साथ दिख जाऊ बाते करते हुए तो उस के साथ मेरा रिश्ता जोड़ दिया जाता है,यहाँ तक कि विक्रम में भी मेरे बगल में कोई आदमी बैठ जाये तब भी मुझ से हजार सवाल पूछे जाते हैं,ये हाल तब है जब मैं बिलकुल भी गलत नहीं हूँ,तो क्यूँ न मैं वाकई चमड़ी की कमाई से गुजारा करूँ,और इस तरह विद्रोह में वो इस पेशे की तरफ मुड़ जाती है|

इन बातों के क्या मतलब निकालूं  मैं,क्या कहूँ कि वो औरतें गलत करती हैं???

क्या उन का अपने बच्चों को पालना गलत है या रोज मर्रा की चीजों को जुटाने के लिए ऐसा करना गलत है?क्या खुद को जताना गलत है? या औरत होना ही उस की सब से बड़ी गलती है…

मुझे खुद ये आर्टिकल लिखने में इतनी दिक्कतें आ रही हैं क्यूंकि मैंने सिर्फ एक कारण को ही ज्यादा तवज्जो दी है स्वाथ्य,उन की परेशानियाँ,पुलिस,ग्राहक आदि बातों का जिक्र नहीं किया है क्यूंकि अगर मैं सब की बात करता तो समेट नहीं पाता  चीजों को….

पर

मेरे पास इस वक़्त इन बातों का कोई जवाब नहीं है कि “वैश्या” सही है या गलत…..

(फोटो गूगल से ली गयी है )



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
March 1, 2013

क्या उन का अपने बच्चों को पालना गलत है या रोज मर्रा की चीजों को जुटाने के लिए ऐसा करना गलत है?क्या खुद को जताना गलत है? या औरत होना ही उस की सब से बड़ी गलती है… मुझे खुद ये आर्टिकल लिखने में इतनी दिक्कतें आ रही हैं क्यूंकि मैंने सिर्फ एक कारण को ही ज्यादा तवज्जो दी है स्वाथ्य,उन की परेशानियाँ,पुलिस,ग्राहक आदि बातों का जिक्र नहीं किया है क्यूंकि अगर मैं सब की बात करता तो समेट नहीं पाता चीजों को सार्थक सवाल उठती पोस्ट !

yogi sarswat के द्वारा
March 1, 2013

सार्थक आलेख !


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