Bimal Raturi

"भीड़ में अकेला खड़ा मै ताकता सब को..."

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शायद आखिरी बार ही कुछ कह लेता ...

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सड़क के एक तरफ मैं और सड़क के दूसरी तरफ वो कॉलेज जाने के लिए रोज खड़े रहते थे,बस इतना पता था कि वो हमारे स्कूल से पढ़ी है और हमारी जूनियर है,कभी गौर नहीं किया ज्यादा क्यूंकि उस वक़्त मेरा गौर कहीं और था खैर….एक दिन फेसबुक पर एक मेसेज आया…हेल्लो सर आप विद्या मंदिर से हैं न…मोबाइल से ऑनलाइन था मैं नाम भी नहीं पता था..तो मैंने उसे उस का नाम पता पूछा,जब पता चला कि ये वही लड़की है जिस से रोज मुलाकात तो होती है पर बात नहीं होती,खैर फेसबुक पर बातों का सिलसिला चल पडा,अब रोजाना मिलने पर बात तो नहीं पर हाय…हेल्लो होने लगी….

नंबर भी बदल लिए आपस में…चैटिंग होने लगी…थोडा मैं उस को जानने लगा..उसी दौरान मेरा ब्रेकअप हुआ और मैं अकेला ही हो गया…मन् नहीं करता था किसी से बात करने का,सब से कट ही हो गया था,उस के मेसेज रोजाना ही आते थे,एक तरफ मैं जब भी दुखी होता तो उस के फनी जोक्स वाले मेसेज आ जाते,धीरे धीरे मैंने भी रिप्लाई करना और उस से बात करना शुरू कर दिया,उस की बातों में इतना चुलबुलापन होता था कि पूरानी बातें दिमाग से धीरे धीरे डिलीट होती जा रही थी…जिस वक़्त किसी से बात नहीं हो रही थी उस वक़्त उस के मेसेज ने मुझे उस दर्द से बहार निकाला….

खैर मेरे मंजिल कुछ और थी तो कॉलेज बदल गया जो पहले रोजाना उस का चेहरा देखने को मिलता था वो अब बंद हो गया,पर मेसेज नहीं रुके..हाँ फ़ोन नहीं होते थे पर मेसेज में कोई कमी नहीं थी….मैं तो रात्रिचर था ही उस को भी रात्रिचर कर दिया….

अब मुझे वो पसंद आने लगी थी,ये मेरे लिए अच्छी बात भी थी और बुरी बात भी…अच्छी बात ये कि मैं उसे पसंद कर रहा था और बुरी ये कि मैं दुबारा प्यार में नहीं पड़ना चाहता था….

अपने दोस्तों से थोडा उस के बारे में बात की उन्होंने भी मुझे काफी कहा कि बोल दे ज्यादा से ज्यादा न ही तो कहेगी न..पर मेरा डर कुछ और था मैं डरा हुआ था एक तो मेरे पुराने अनुभव खराब थे और दूसरा मैं सोचता था कि वो मुझे क्या कह के हाँ बोलेगी…कि जिस बन्दे से स्कूल पास करने के पांच साल बाद भी ग्रेजुएसन नहीं हो पाई वो बन्दा क्या मेरे साथ रेलेसन में आये…और मैंने उस से कटना शुरू कर दिया…..

मैंने अब उसे मेसेज करना छोड़ दिया था और पूरी तरह उसे भुलाने की कोसिस करने लगा…साल गुजरा…दोस्ती रही पर कम बात करने लगा मैं उस से …बीमार रहती थी तो कभी कभार पूछ लेता कैसी  है….बहुत बार सोचा..आज बताता हूँ कल बताता हूँ….एक बार लैटर भी लिखा पर कभी दे नहीं पाया….

एक तरफ मुझे प्यार में नहीं पड़ना था…दूसरी तरफ उस के ना का भी डर था शायद…

दूसरा साल भी गुजर गया…पर मैंने उसे नहीं बोला….एक दिन रात में बातों ही बातों में उस से कह दिया रात में चैटिंग के दौरान…उस ने कहा कि वो इस पर बिस्वास नहीं करती….शायद इतना मेरे लिए काफी था…अब तो एक तरह से खुद को कट ही कर लिया था उस से पर उस के मेसेज आने बंद नहीं हुए…तीसरा साल भी हो गया…मैं ख्वाइश को जितना दबाता उस का एक मेसेज सब कुछ तबाह कर के रख देता….पर अब मैंने उस से कभी कभी ही मेसेज करता था…जब ज्यादा दिन हो जाते तो एक मेसेज कर देता कभी कभार जब उस का कोई इस तरह का मेसेज आता कि “लोग भूल गये”…

कल रात उस का मेसेज आया मैंने सोचा बहुत दिन हो गये चैट किये हुए चलो बात कर ली जाये बातों की शुरुवात में ही पूछा की जो एंट्रेंस दिया था उस का रिजल्ट आ गया क्या? उस ने कहा कि रिजल्ट तो कब का आ गया था पर मेरेट हाई गये है और वो साउथ इंडिया के एक कॉलेज की काउंसलिंग में जा रही है….मैंने पूछा कब लौटोगी..उस ने कहा पता नहीं शायद अब वहीँ रहूँ…दिल बैठ गया….उस से कहा कि क्या हम मिल सकते हैं..उस ने कहा कि वक़्त तो नहीं है पर मैं आप को बता दूंगी…हिम्मत नहीं बची तब बात करने की…मिस यू गुड नाईट कह के मेसेज भेजा…उस का भी मिस यू टू गुड नाईट का रिप्लाई आया….रात भर ढंग से नींद नहीं आई…सुबह से तेज बारिस हो रही थी..तो मेसेज नहीं किया मैंने..तीन बजे के करीब बारिस थोडा रुकी तो मैंने उसे मेसेज किया कि कहाँ हो उस ने जगह बताई…मैंने उसे कहा मिल सकते हैं..उस ने हाँ कहा..मैंने रिप्लाई किया कि पंद्रह मिनट बस्स…और मैं तैयार हो के निकल पडा…रस्ते में वो मिल गयी…खुश थी वो..और मैं उतना ही अन्दर से दुखी….ज्यादा बात नहीं मैंने पूछा थोडा बहुत उस ने कहा कि लेट हो रही है मैंने कुछ भी पैकिंग नहीं की..मैं चाहता तो था कुछ देर बात करना पर रोकने की हिम्मत नहीं हुई…उसे गाड़ी में बैठाया और उस के घर की तरफ छोड़ने चला गया जो बमुश्किल पांच मिनट का रास्ता था तो अंदाजा लगाया ही जा सकता है कि कितनी बात हुई होगी..उस के घर के आगे वाली रोड पे छोड़ा और नयी ज़िन्दगी के लिए गुड लक कहा..और थोडा आगे घुमने चला गया….

सर में दर्द हो रहा है कि वो जा रही है चाहे भले ही बात नहीं होती थी फ़ोन पर ये उम्मीद जरुर पाल रखी थी कि किसी दिन उसे जरुर मिल के बोलूँगा कि मैं उसे पसंद करता हूँ….उसे अपनी ज़िन्दगी में शामिल करना चाहता हूँ…. अब शायद ही कभी मौका मिले..

आज रात उस की ट्रेन है….उस की नयी ज़िन्दगी के लिए शुभकामनायें…..

आगे मेरे पास कुछ नहीं है लिखने को………



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
August 21, 2013

बहुत बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी.बेह्तरीन अभिव्यक्ति . शुभकामनायें. आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

rajuniyal के द्वारा
June 17, 2013

hota hai aisa v man ko udaas mat karo “उसी की तरहा मुझे सारा ज़माना चाहे , वो मेरा होने से ज्यादा मुझे पाना चाहे , मेरी पलकों से फिसल जाता है चेहरा तेरा , ये मुसाफिर तो कोई और ठिकाना चाहे , एक बनफूल था इस शहर में वो भी ना रहा , कोई अब किस के लिए लौट के आना चाहे , ज़िन्दगी हसरतों के साज़ पे सहमा-ठिठका , वो तराना है जिसे दिल नहीं गाना चाहे , हम अपने बदन से कुछ इस तरह हुए रुखसत , साँस को छोड़ दिया जिस तरफ जाना चाहे….!”


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