Bimal Raturi

"भीड़ में अकेला खड़ा मै ताकता सब को..."

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कैसे कह दूँ मेरा भारत महान ?

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misel cross

मेरे इस आलेख का शीर्षक आमिर खान के “इनक्रेडेबल इण्डिया” के विज्ञापनों पर सवाल उठाने के लिए काफी है, वैसे भी हम सिर्फ अपनी महानता की गप्पे ही हांकते रहते हैं और मुझे तो इस बात पर भी अब शक होने लगा है कि हम कभी जगत गुरु भी थे या नहीं| मैं न बढ़ते हुए बलात्कारों पर कुछ कहूँगा न गरीबी पे न टोने टोटके पे,न भारत निर्माण,न इण्डिया शायनिंग,न मोदी पे और न ही राहुल पर क्यूंकि ये हमारे अन्दर के मुद्दे हैं, काफी लोगों को लगता है अन्दर चाहे कुछ भी हो भारत से बाहर हमारी छवि अच्छी रहनी चाहिए इसी लिए हम ने आमिर खान से “इनक्रेडेबल इण्डिया” के कई विज्ञापन करवाए और भारत को इस से फायदा भी हुआ, भारत में विदेशियों का आना बढ़ा पर तब चाहे वो घूमना हो,मेडिकल टूरिज्म हो ,पढ़ाई हो या सोशल वर्क के लिए ही इण्डिया में रहना हो| पर एक अहम् सवाल कि जो लोग बाहर से यहाँ आ रहे हैं वो भारत की क्या छवि ले कर वापस जा रहे हैं?

“भारत महिलाओं के लिए सुरक्षित जगह नहीं है. भारत मुसाफिरों के लिए स्वर्ग और महिलाओं के लिए नरक है” ये भारत की हकीकत लिखी है शिकागो यूनिवर्सिटी की छात्रा मिशेल क्रॉस ने जो 2012 में दिल्ली में दामिनी केस से कुछ वक़्त पहले भारत आई थी और जल्द ही चली गयी|

उस ने अपनी कहानी ‘इंडिया: द स्टोरी यू नेवर वॉन्टेड टु हियर’ नाम से एक वेबसाइट में लिखी है और मुख्य बात ये है कि ये आलेख एक वाईरल की तरह पूरी दुनिया में फ़ैल गया है और अभी इसे करोड़ों लोगों द्वारा पढ़ा जा चुका है|

उस ने लिखा है भारत में हुए अनुभवों के बारे में जब भी उस के साथी पूछते हैं तो उस के समझ नहीं आता कि आखिर जवाब क्या दिया जाए ?

पुणे में गणेश उत्सव के दौरान जैसे ही उस ने अपने दोस्तों के साथ डांस शुरू किया तो गणेश उत्सव रुक गया और लोग उन के चारों ओर घेरा बना कर उन की रिकार्डिंग कर रहे थे|

साड़ी खरीदते हुए लोग उन्हें बुरी नज़र से देख रहे थे और जिस दूकान से उस ने सैडल खरीदी उस दुकानदार ने काफी देर तक उन का पीछा किया| गोवा में एक होटल में मेरी दोस्त और मेरे साथ बलात्कार करने की कोशिश की गयी|

बस्स कुछ यही मेरा अनुभव है भारत यात्रा का|

‘उन आंखों से निपटने का कोई तरीका नहीं हैं जो आपको हर रोज घूरती हैं”,“मैंने खुद को ढका हुआ तो था लेकिन छिपा नहीं सकती थी”और ”कई लोगों ने मेरी और मेरे दोस्तों की फोटो को इंटरनेट पर मोर्फ कर पोर्नोग्राफी वेबसाइट पर डाल दी हों.” ये काफी कुछ बयाँ करने के लिए काफी है| आज वो लड़की “स्‍ट्रेस डिस्‍ऑर्डर” की शिकार हो चुकी है और मनोवैज्ञानिक इलाज़ के दौर से गुजर रही है|

ये सारी बाते थी उस के नज़रिए से पर अगर आप उस की बातों पर गौर करें तो पाएंगे कि उस ने कुछ भी झूट नहीं लिखा है| मैं अपने आसपास की ही बात करूँगा उत्तराखंड कहने को देवभूमि, ऋषिकेश हरिद्वार,देहरादून में आप को काफी विदेशी आराम से मिल जायेंगे उन को देख के हमारा नजरिया भी कुछ इस तरह होता है कि हम इस के साथ कुछ भी कर लें हमारा इलाका है, क्या खोजेंगे ये हमे और यही वजह है कि देवभूमि में अब तक कई विदेशियों के साथ लूटपाट,बलात्कार,छेड़खानी के दर्ज़नो मामले दर्ज हैं|

मुझे याद है जब हम दामिनी वाले मुद्दे पर देहरादून में प्रदर्शन कर रहे थे तो हमारे साथ कुछ विदेशी युवतियां भी थी और प्रदर्शन से इतर उन से हाथ मिलाने वालों का ताँता लगा रहता था| ये है हमारी हकीकत खैर हम अपनी बहु बेटियों को नहीं बचा पा रहे हैं तो बाहर वालों के लिए तो क्या ही अपेक्षा रखें|
बदलना होगा हमे खुद को,खुद के लिए अपनों के लिए अपने ज्ञान को बढ़ाना होगा ग्लोबलाइजेशन के दौर में होते हुए बहार के लोगों को अपनी और आकर्षित करना होगा,भारत के आर्थिक,सामाजिक विकास के लिए और ये विकास “इंडिया: द स्टोरी यू नेवर वॉन्टेड टु हियर” जैसी कहानियों को लिखे और पढ़े जाने के बाद शायद ही संभव हो |



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sunny Kumar के द्वारा
August 31, 2013

मैं आपकी बात से पूर्णत सहमत हूँ बिमल जी .. मैं अनेको बार इन सब समस्याओं का सामना कर चूका हूँ। कुछ समय पहले मेरे कुछ विदेशी मित्र जब भारत घूमने आये तो भ्रमण कराते समय उन्होंने इतने सवाल पूछे कि समझ नहीं आया किन किन समस्याओं पर पर्दा डालूँ । स्वभावत: वह पहले से ही यहाँ कि व्यवस्था जानते थे इसलिए मैं उनसे झूठ नहीं बोल सकता था। और मेने ऐसे कई ब्लोग्स देखें है जो अन्य देश के व्यक्ति द्वारा लिखे गए हैं एवं भारत भ्रमण कर चुके हैं, जिसमे हम अपनी संस्कृति पर इतराने वाले भारतीय लोगों का पूरा चिट्टा लिखा है । सादर,


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