Bimal Raturi

"भीड़ में अकेला खड़ा मै ताकता सब को..."

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इंसानियत कैसे मरी ?

Posted On: 17 Sep, 2013 Others,लोकल टिकेट,social issues में

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Humanity

देहरादून के एक अखबार का सर्वे चल रहा है आजकल,कई लड़के लड़कियां उस टीम में हैं हमारे घर की तरफ जो टीम सर्वे कर रही थी उस में कई मेरे जानने वाले भी थे|    कल शाम नुक्कड़ पर एक से मुलाकात हुई मैंने पूछा और भाई क्या हाल चाल?? क्या क्या निकल के आ रहा है सर्वे में ??? मेरा इतना कहना था कि वो अपना दुखड़ा रो पडा… भाई और सब तो जो भी निकल रहा हो पर इंसानियत ख़त्म हो गयी ये जरुर निकल रहा है… मैंने पूछा क्यूँ क्या हुआ??? तो उस ने मुझे बताया कि कल सर्वे करने के दौरान मैं धूप में काफी थक गया था तो मैंने एक घर में सर्वे करने के बाद पानी माँगा उस ने कहा कि “हमारे घर में पानी नहीं है आगे वाले घर से मागों”,जब मैंने आगे वाले घर में सर्वे ख़तम कर के उन से भी पानी माँगा तो उन्होंने भी मुझे यही कहा | मैं थक के चूर हो गया था और जैसे ही उन के गेट से बाहर निकला तो चक्कर खा कर गिर पडा, मैं उन के सामने ही गिरा था पर उन्होंने मुझे नहीं उठाया बगल में एक सब्जी वाला गुजर रहा था तो उस ने मुझे उठाया और पानी पिलाया | मैंने उस से पूछा भाई ये घटना कहाँ हुई तो उस ने हमारे ही पड़ोस वाले मोहल्ले के बारे में बताया| मैं निकल पडा उस घर की तरफ, इत्तेफाकन वो घर मेरे साथ बचपन में पढने वाले एक लडके का था, मैंने गेट खोल कर नमस्ते किया दोस्त की मम्मी को और सीधे कल वाली बात पे आया कि आंटी जी कल आप से किसी ने पानी माँगा और आप ने नहीं दिया और साथ ही वो लड़का आप के ही सामने बेहोश हुआ फिर भी आप गेट बंद कर के अन्दर चली गयी…
आंटी ने मुझे जवाब दिया – बेटा मैं तो डर गयी थी मैंने सोचा कोई कच्छा धारी गिरोह का होगा और जब वो मेरे सामने बेहोश हुआ तब तो मैं और डर गयी कि कहीं मैं उसे उठाने गयी और उस ने मुझे दबोच लिया… जवाब मुझे मिल चुका था गलत वो सर्वे करने वाला लड़का भी नहीं था और न ही गलत पानी न पिलाने वाली आंटी ही थी….

पर इस से एक नया सवाल जो मेरे मन में आया अगर दोनों ही अपनी जगह सही हैं तो फिर इंसानियत मरी तो मरी किस की वजह से …



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
September 21, 2013

समाज को आइना दिखता सार्थक ब्लॉग

yogi sarswat के द्वारा
September 21, 2013

आदमी करे भी तो क्या ? ऐसी घटनाएं आये दिन होती हैं तो सतर्क रहना भी जरुरी है ! लेकिन फिर भी मैं कहूँगा की इंसानियत को जिन्दा रखने वाले लोग भी हैं अभी संसार में

Pradeep Kesarwani के द्वारा
September 18, 2013

में ये कहूँगा की अब इंसानियत जाति, धर्म, मजहब, और औकात देखकर ही की जाती हैं, लेकिन ये हर जगह पर नही हैं, मुझे याद हैं जब में भी सर्वे के दौरान एक गावं में था, वहा के लोग खुद पूछ रहे थे पानी के लिए.. अब हम इसको क्या समझे में भी उनके लिए उतना ही अंजन था, जितना की आपका दोस्त… सुन्दर अभीलेख बधाई…


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